बदौसा की आवाज़ | राजनीतिक समाचार
नई दिल्ली। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान को लेकर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं को वोटर आईडी से जोड़ना लोगों के अधिकारों पर हमला है।
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 30 अक्टूबर को राष्ट्रीय जन योजना अभियान 2026-27 की कार्यशाला के दौरान कहा था कि उनके मंत्रालय की योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और भुगतान के लिए आधार के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा।
कांग्रेस पार्टी के नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री के बयान का वीडियो साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर वोटर लिस्ट से लाखों लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ भी वोटर आईडी से जुड़ गया, तो मतदाता सूची से नाम हटने का असर लोगों के सरकारी लाभों पर भी पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आज पंचायती राज की योजनाएं और कल राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास, छात्रवृत्ति तथा आरक्षण जैसी सुविधाओं का क्या होगा?
उन्होंने कहा कि वोट देना नागरिक का अधिकार है, कोई शर्त नहीं। गरीब की पेंशन उसके वोटर कार्ड की गुलाम नहीं हो सकती।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “ये सिर्फ वोट चोरी नहीं, ये हक़ चोरी है। हम ये होने नहीं देंगे।”
विपक्ष ने जताई चिंता
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रता के आधार पर मिलना चाहिए, न कि मतदाता सूची में नाम होने की शर्त पर।
क्या सभी योजनाओं में आधार की जगह वोटर आईडी लागू हो गई?
फिलहाल केंद्रीय मंत्री का बयान पंचायती राज मंत्रालय की योजनाओं और लाभार्थियों की पहचान से संबंधित बताया गया है। सभी सरकारी योजनाओं में आधार की जगह वोटर आईडी अनिवार्य किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और लागू होने की तारीख स्पष्ट होना बाकी है।
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